चौधरी चरण सिंह अभिलेखागार

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स्वागत, प्रिय आगंतुक !

अभिलेखन एक ऐसी वैज्ञानिक विद्या और विधि है, जिसके लिए कौशल और संसाधन वांछनीय है जो कदाचित मेरे पास नहीं है I मेरा प्रायः अनुभव मानव संसाधन तथा समबंधित प्रक्रियाओं, परियोजनाओं तथा पूँजी प्रावधान के क्षेत्र में है, जो इतिहास एवं राजनीति विज्ञान की विशिष्टाओं से काफ़ी परे है I चौधरी चरण सिंह जैसे महापुरुष की सार्वजनिक स्मृति पुनर्जीवित करने की प्रतिबद्धता के लिए यह अभिलेखन मेंने कौशल तथा दक्षता के आभाव के बावजूद तैयार किया है I

इस अभिलेखागार को तैयार करने मैं मुझे अनेक लोगो ने सहयोग दिया, जिसमे सर्वप्रथम हमारी नानी स्वर्गीय गायत्री देवी, मेरे पिता डॉक्टर जयपाल सिंह तथा माँ वेदवती ने १९९४ में चौधरी चरण सिंह की लिखित विरासत को नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय (दिल्ली) मे दान करके उस विरासत की हमेशा के लिया संरक्षित दिया I (मैं यहाँ कहना चाहूँगा कि नेहरू संग्रहालय और पुस्तकालय एक बहुत अच्छी तरह से प्रबंधित संस्था है) I विडंबना यह है चौधरी चरण सिंह का यह बहुमूल्य कोष भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की स्मृति मे निर्मित संस्था में संरक्षित है - वही नेता, जिन्हें चरण सिंह ने भारत के विकास के लिए भारत भारी उद्योगों को वरीयता, कृषि की उपेक्षा, राष्ट्र नीति एवं शहरी नीति में दुलमुलपन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था I इन विलोम सम्बन्धों के बावजूद दोनों नेताओं की विचार सम्पदा एक ही परिसर में है, यही हमारे लोकतंत्र की मज़बूती और ख़ूबसूरती भी है I

नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में 'चरण सिंह के पत्रों', दिल्ली की जनता के लिए आसानी से उपलब्ध हैं। शोधकर्ताओं कृपया आप फ़ोन पर नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय (दिल्ली) के प्रमुख अनुसंधान एवं प्रकाशन विभाग के फ़ोन +91 11 23010666, और +91 11 26895754 पर संपर्क कर सकते हे। पत्रों का सूचकांक इस प्रकार हैं:

नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय - चरण सिंह के पत्रों: प्रथम किस्त

  1. नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में चरण सिंह के पत्रों की प्रथम किस्त: विषय फ़ाइल
  2. नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में चरण सिंह के पत्रों की प्रथम किस्त: उनके द्वारा भाषण और लेखन
  3. नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में चरण सिंह के पत्रों की प्रथम किस्त: दूसरों के द्वारा भाषण और लेखन

नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय - चरण सिंह के पत्रों: द्वितीय किस्त

  1. नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में चरण सिंह के पत्रों की द्वितीय किस्त: विषय फ़ाइल
  2. नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में चरण सिंह के पत्रों की द्वितीय किस्त: पत्राचार

इस अभिलेखागार के कोष मे चौधरी चरण सिंह द्वारा लिखित सभी पुस्तकों (दुर्लभ, मूल संस्करण) शामिल है; विद्वानों, आलोचकों और राजनेताओं द्वारा उन पर लिखा कई पुस्तकें और अनेक लेख; उनके राजनैतिक दलों के घोषणापत्र तथा बैठकों के कार्यवृत मिनट; लेख और ऑडियो में उनके भाषण; सरकार के विभिन्न विभागों से संगृहीत वीडियो तथा अडियो; हजारों दुर्लभ तस्वीर; उनके द्वारा लिखे हुए और प्राप्त पत्र सभी सम्मिलित है। अभिलेखागार में चौधरी साहब पर लिखी अनेक पुस्तकें, परिपत्र, समाचार पत्र तथा पत्रिका भी हैं, जिसमे से कुछ अतिप्रशंसायुक्त और चापलूस मानी जा सकती हैं - किन्तु यह भी हिंदुस्तानी सामाजिक परंपरा के अनुरूप हैं, तथा अभिलेखागार का एक महत्वपूर्ण अंग हैं I इनके साथ साथ, कई लेख ऐसे भी हैं जो चौधरी चरण सिंह चरण सिंह की खुली आलोचना करते हैं I १९६१ - १९८५ के दौरान जाने माने अमरीकी प्रोफेसर तथा राजनीति-शास्त्री पॉल ब्रास ने गहराई से उत्तर प्रदेश की राजनीती का अध्ययन किया था । उसी दौरान पॉल ब्रास द्वारा चौधरी साहिब के कई ऑडियो साक्षात्कार तथा उत्तर प्रदेश में कई सौ राजनेताओं का साक्षात्कार संग्रह हैँ ।

यह सामग्री एकत्र करने में हमें लगभग १२ महीने लगे हैं; यह प्रक्रिया सतत जारी रहेगी, इससे पहले कि हिंदुस्तानी सोच और व्यवहार से यह लिखित इतिहास ओझल हो जाये I मन में बार-बार आता की मेनै देर से इस संग्रह की प्रक्रिया शुरू की, बहुत पहले करनी चाहिए थी - परन्तु फिर सोचता हूँ कि हर कार्य का अपना समय होता है। चौधरी साहब के निधन के २६ साल बाद उनको कई करीबी मित्र क्या उनके कई कनिष्ठ अनुयायी भी गुज़र गए हैं, उनके साथ-साथ उनकी यादें भी चली गईं I हम सब ने कई पीढ़ियों का अमूल्य ज्ञान औ यादें खो दीं । परन्तु हमने अब ठान लिया है की अब हम और यादें न खोएंगे, हम चौधरी साहिब के कार्य उनके संस्मरण उनके जानने वालों से उपलब्ध दस्तावेजों द्वारा जानने मे सक्षम होंगे - वास्तव में यही इस संग्रह का उद्देश्य है। निकटस्थ राजनैतिक सहयोगियों तथा परिवार की स्मृतिओं को रिकॉर्ड करने के लिए हमने एक 'मौखिक इतिहास परियोजना' आरम्भ की है। यह निःसंदेह कठिन और समयशील कार्य है : साक्षात्कार हेतु उपयुक्त व्यक्तियों का चयन, आमने सामने व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा रिकॉर्डिंग, प्रासंगिकता और चयनात्मक प्रकाशन का निर्धारण।

आप सहमत होंगे की सामग्री का संरक्षण वास्तविक रूप में आजीवन कार्य है, जीवन भर चलने वाला प्रयास है। संग्रह पर काम करने वाले शोधकर्ता और पुरालेखपाल को कई तरह की गंभीर जानकारी हासिल करनी पड़ेगी : चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार की पृष्ठभूमि, १९३० से चौधरी साहब तथा हिन्दुस्तान का राजनीतिक और ऐतिहासिक काल, स्वाधीनता संग्राम के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय स्थर स्तर पर एवं उत्तर प्रदेश राज्य का राजनैतिक ऐतिहास, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में १९३० के दशक से १९८० तक पार्टी में गुटीय राजनीति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर्य समाज आंदोलन का इतिहास, कृषि बनाम उद्योग की लड़ाई, १९६७ से १९८५ तक कभी चौधरी चरण सिंह के साथ और कभी उनके विरोध में शामिल जनसंघ और विभिन्न सोशलिस्ट धाराएं, पुरानै लेख, टैग, अपलोड तकनीक, और संग्रह में हर टुकड़े पर आगंतुक के लिए संदर्भ, व्याख्या और टिप्पणी के लिए अभिलेखागारी को समय, धन और धैर्य की जरूरत पड़ेगी। हमारे लिए शायद सबसे बड़ी चुनौती रहेगी सभी सामग्री को समकालिक तौर पे हिंदी तथा अंग्रेजी में आप तक पहुँचना ।

संग्रहित सामग्री के अतिरिक्त काफी कुछ अभी भी खोजा जाना बाक़ी है - उदाहरण के लिए, समाचार पत्र तथा पत्रिकाओं से लेखों का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद इस वेबसाइट पर आप तक पहुँचना, फोटोग्राफ (प्रिंट, नेगेटिव) को सरकारी विभागों से ढूंढ निकलना और उसके पश्चात् उन सरकारी विभागों या १९८० के दशक से पहले के निजी फिल्म फोटोग्राफरों की पकड़ से निकलना I इन दोनों कार्यों के लिए आपकी सहयोग की ज़रूरत पड़ेगी, आशा है आप में से कई शुभचिंतक आगे आयेंगे I

यह जानकारी साझा करने का उद्येश्य मात्र आपको चौधरी चरण सिंह अभिलेखागार हेतु किये गए प्रयासों से अवगत कराना ही नहीं है, अपितु यह भी स्पष्ट करना कि अभिलेख में समय लगाना स्वाभाविक है। आपको अभिलेखागार वेबसाइट के विभिन्न प्रष्टों में 'इस वेबसाइट के हिंदी अनुवाद का कार्य प्रगति पर है' संदेश मिलना और अपर्याप्त सूचना तथा सन्दर्भ रहित सूचना मिलना भी सम्भव है। हम अभिलेखागार वेबसाइट को संकलित रूप में सार्वजैनिक कर रहे हैं, तथा कदम-कदम पर वेबसाइट के विभिन्न कमज़ोर हिस्सों को मज़बूत करेंगे । इस प्रकार के पेचीदा और सूचना-संकलन पर आधारित परियोजना, जो निःसंदेह इतिहास सृजन है, पूर्णरूपेण प्रस्तुत करना सम्भव नहीं है । ऐसी परियोजना अपने मक़सद की ओर बढ़ती है, ध्यान से, देखभाल के साथ ।

आग्रह है कि आप info@chaudharycharansingh.org को लिखें और विचार व्यक्त करते हुए यह अंकित करें की कहाँ क्या कम या अधिक, अथवा तेज़, किया जाना चाहिये । श्र्येस्कर यह होगा कि आप चौधरी चरण सिंह अभिलेखागार के स्वयंसेवक के रूप में स्वेच्छा से सम्बंधित होकर चौधरी चरण सिंह की स्मृतियाँ आगामी पीढ़ी हेतु जीवंत करने में सार्थक सहयोग प्रदान करें ।

हर्ष सिंह लोहित
२३ दिसंबर २०१५

पुस्तकें

१९९२, भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
1992, Ministry of Information and Broadcasting Government of India